सबसे अच्छा शक्तिवर्धक पीने का पानी कैसा हो

Dheeraj Kumar on 10 May, 2022

धरती पर पानी के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। शायद ही कोई ऐसा जीवित प्राणी और उसकी कोशिकाएं हों, जिसमें पानी की मौजूदगी न हो। सीधे कहें तो हम 50 फीसदी से ज्यादा पानी ही हैं। इसलिए पानी का शरीर में सही अनुपात में होना जरूरी है। न कम हो और न ज्यादा। कब, कितना और किस प्रकार पानी पिया जाए कि वह शरीर में लिए लाभदायक रहे। शरीर में क्षार तत्व की कमी के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता क्षीण होने लगती है एवं रक्त में सफेद कोशिकाएं कम होने लगती हैं। हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। अम्लपित्त, गैस, जोड़ों में दर्द एवं कब्जियत जैसे रोगों की संभावना बढ़ने लगती है। जिससे शरीर को सुचारू रूप से संचालित करने वाला सारा तंत्र अनियंत्रित होने लगता है तथा शरीर रोगों का घर बन जाता है। ऐसी स्थिति में प्रकृति शरीर के अन्य तंतुओं से क्षार तत्व खींचकर अपना पोषण करने लगती है। परिणाम स्वरूप शरीर के वे अवयव जिसमें से क्षार तत्व शोषित कर लिए जाते हैं, निःसत्व, निर्बल एवं रोगी हो जाते हैं।

शरीर में जल के कार्य :- हवा के पश्चात शरीर में दूसरी सबसे बड़ी आवश्यकता पानी की होती है। पानी के बिना जीवन लम्बे समय तक नहीं चल सकता। शरीर में लगभग दो तिहाई भाग पानी का होता है। शरीर के अलग-अलग भागों में पानी की आवश्यकता अलग-अलग होती है। जब पानी के आवश्यक अनुपात में असंतुलन हो जाता है तो, शारीरिक क्रियाएँ प्रभावित होने लगती हैं।

हमारे शरीर में जल का प्रमुख कार्य भोजन पचाने वाली विभिन्न प्रक्रियाओं में शामिल होना तथा शरीर की संरचना का निर्माण करना होता है। जल शरीर के भीतर विद्यमान गंदगी को आंखों से आंसुओं, नाक से श्लेष्मा, मुँह से कफ, त्वचा से पसीने एवं आंतों से मल-मूत्र द्वारा शरीर से बाहर निकालने में सहयोग करता है। शरीर में जल की कमी से कब्ज, थकान, ग्रीष्म ऋतु में लू आदि की संभावना रहती है। जल के कारण ही हमें छः प्रकार के रसों-मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा, तीखा और कसैला आदि का अलग-अलग स्वाद अनुभव होता है।

 जल के कारण ही शरीर का तापक्रम नियंत्रित होता है। शारीरिक शुद्धि के लिए भी जल आवश्यक होता है। शरीर के निर्माण तथा पोषण में अपनी अति-महत्वपूर्ण भूमिका के कारण किसी भी परिस्थिति अथवा रोग में पानी पीना वर्जित नहीं होता है।

जल की विशेषताएँ :- पानी अपने सम्पर्क में आने वाले विभिन्न तत्वों को सरलता से अपने अंदर समाहित कर लेता है। चुम्बक, पिरामिड के प्रभाव क्षेत्र में पानी को कुछ समय तक रखने से उसमें चुम्बकीय और पिरामिड ऊर्जा के गुण आ जाते हैं। सोना, चांदी, तांबा, लोहा आदि बर्तनों अथवा धातुओं के सम्पर्क में पानी को कुछ अवधि तक रखने से पानी संबंधित धातु के गुणों वाला बन जाता है।

स्वास्थ्य हेतु क्षारीय पानी गुणकारी:- पानी की दूसरी महत्वपूर्ण आवश्यकता उसके अम्ल-सार के अनुपात की होती है। जिसको Ph के आधार पर मापा जा सकता है। पानी का Ph जब 7 होता है तो इसमें अम्ल एवं क्षार तत्व बराबर मात्रा में होते हैं। Ph यदि 7 से कम होता है तो पानी अम्ल की अधिकता वाला और 7 से अधिक 9 वाला पानी क्षार गुणों वाला होता है।